Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.348.84: भारतभूषण! कुरुनन्दन! यह सात्वत-धर्म का परिचय है। यदि तुम कर सको, तो इस धर्म का उचित रीति से पालन करो। 84॥   |   mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  12.348.84 
एष ते कथितो धर्म: सात्वत: कुरुनन्दन।
कुरुष्वैनं यथान्यायं यदि शक्तोऽसि भारत॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
भारतभूषण! कुरुनन्दन! यह सात्वत-धर्म का परिचय है। यदि तुम कर सको, तो इस धर्म का उचित रीति से पालन करो। 84॥
 
Bharatbhushan! Kurunandan! This is the introduction to Satvat-Dharma. If you can, follow this religion properly. 84॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)