Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.348.79-80h: जनमेजय ने पूछा - ऋषिवर! वैकारिक पुरुष किस प्रकार भगवान को प्राप्त कर सकता है? कृपया मुझे अपने अनुभव के अनुसार यह सब बताएँ तथा उसकी प्रवृत्तियों का भी क्रमशः वर्णन करें। | mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जनमेजय उवाच
कथं वैकारिको गच्छेत् पुरुष: पुरुषोत्तमम्॥ ७९॥
वद सर्वं यथादृष्टं प्रवृत्तिं च यथाक्रमम्।
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा - ऋषिवर! वैकारिक पुरुष किस प्रकार भगवान को प्राप्त कर सकता है? कृपया मुझे अपने अनुभव के अनुसार यह सब बताएँ तथा उसकी प्रवृत्तियों का भी क्रमशः वर्णन करें।
Janamejaya asked - Sage! How can a Vaikarik Purush attain the Supreme Personality of Godhead? Please tell me all this according to your experience and also describe his tendencies step by step. 79 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥