जनमेजय उवाच
कथं वैकारिको गच्छेत् पुरुष: पुरुषोत्तमम्॥ ७९॥
वद सर्वं यथादृष्टं प्रवृत्तिं च यथाक्रमम्।
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा - ऋषिवर! वैकारिक पुरुष किस प्रकार भगवान को प्राप्त कर सकता है? कृपया मुझे अपने अनुभव के अनुसार यह सब बताएँ तथा उसकी प्रवृत्तियों का भी क्रमशः वर्णन करें।
Janamejaya asked - Sage! How can a Vaikarik Purush attain the Supreme Personality of Godhead? Please tell me all this according to your experience and also describe his tendencies step by step. 79 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥