Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.348.78-79h: श्रेष्ठ! देवता और ऋषिगण कामनाओं से युक्त होकर सत्त्वगुण में स्थित होते हैं। उनमें भी शुद्ध सत्त्वगुण का अभाव होता है, इसलिए वे वैकारिक माने जाते हैं। 78 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रेष्ठ! देवता और ऋषिगण कामनाओं से युक्त होकर सत्त्वगुण में स्थित होते हैं। उनमें भी शुद्ध सत्त्वगुण का अभाव होता है, इसलिए वे वैकारिक माने जाते हैं। 78 1/2॥
The best! Gods and sages are situated in the Sattva Guna filled with desires. They also lack pure Sattva Guna, hence they are considered Vaikarik. 78 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥