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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा  »  श्लोक 77-78h
 
 
श्लोक  12.348.77-78h 
पश्यत्येनं जायमानं ब्रह्मा लोकपितामह:॥ ७७॥
रजसा तमसा चैव मानसं समभिप्लुतम्।
 
 
अनुवाद
ऐसे मनुष्य का जन्म होने पर ब्रह्माजी उस पर कृपा करते हैं (और उसे कर्म-मार्ग पर नियुक्त करते हैं)। उसका मन रजोगुण और तमोगुण के प्रवाह में डूबा रहता है। 77 1/2।
 
When such a man is born, the Lord Brahma bestows his blessings on him (and he appoints him to the path of action). His mind remains immersed in the flow of Rajoguna and Tamoguna. 77 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)