श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा  »  श्लोक 76-77h
 
 
श्लोक  12.348.76-77h 
राजसी तामसी चैव व्यामिश्रे प्रकृती स्मृते।
तदात्मकं हि पुरुषं जायमानं विशाम्पते॥ ७६॥
प्रवृत्तिलक्षणैर्युक्तं नावेक्षति हरि: स्वयम्।
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! राजसी और तामसी - ये दोनों स्वभाव विकारों से मिश्रित हैं। जो मनुष्य राजस और तामस स्वभावों के साथ जन्म लेता है, वह प्रायः सकाम कर्मों की ओर प्रवृत्त होता है। इसलिए भगवान श्रीहरि उसकी ओर नहीं देखते। 76 1/2॥
 
Prajanath! Rajasi and Tamasi – these two natures are mixed with vices. The man who is born with Rajas and Tamas nature is often characterized by inclination towards fruitful actions. Therefore Lord Shri Hari does not look at him. 76 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)