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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा
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श्लोक 75
श्लोक
12.348.75
नारायणेन दृष्टस्तु प्रतिबुद्धो भवेत् पुमान्।
एवमात्मेच्छया राजन् प्रतिबुद्धो न जायते॥ ७५॥
अनुवाद
राजन! जिस पर भगवान नारायण की कृपा होती है, वही ज्ञानी होता है। इसी प्रकार केवल अपनी इच्छा से कोई ज्ञानी नहीं होता। 75॥
Rajan! Only the person on whom Lord Narayana's blessings fall upon becomes knowledgeable. In this way no one becomes wise merely by his own will. 75॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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