श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  12.348.73 
जायमानं हि पुरुषं यं पश्येन्मधुसूदन:।
सात्त्विकस्तु स विज्ञेयो भवेन्मोक्षे च निश्चित:॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य जन्म-मरण के चक्र में फँसा हुआ है और जिस पर भगवान मधुसूदन की कृपा दृष्टि है, उसे सात्त्विक समझना चाहिए। वह मोक्ष का निश्चित अधिकारी हो जाता है ॥ 73॥
 
The person who is caught in the cycle of birth and death and is looked upon by Lord Madhusudan with his grace should be considered a Sattvik (pure) person. He becomes the sure claimant of salvation. ॥ 73॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)