Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.348.72: जो मोक्षमार्ग में दृढ़ रहते हैं और जिनकी तृष्णा सर्वथा नष्ट हो गई है, उन समस्त मुनियों के योग-कल्याण का भार स्वयं भगवान नारायण ही वहन करते हैं ॥72॥ | mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनीषिणो हि ये केचिद् यतयो मोक्षधर्मिण:।
तेषां विच्छिन्नतृष्णानां योगक्षेमवहो हरि:॥ ७२॥
अनुवाद
जो मोक्षमार्ग में दृढ़ रहते हैं और जिनकी तृष्णा सर्वथा नष्ट हो गई है, उन समस्त मुनियों के योग-कल्याण का भार स्वयं भगवान नारायण ही वहन करते हैं ॥72॥
Lord Narayana himself bears the burden of the yoga-welfare of all those sages who remain steadfast in the path of salvation and whose thirst has been completely destroyed. 72॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥