मनीषितं च प्राप्नोति चिन्तयन् पुरुषोत्तमम्।
एकान्तभक्ति: सततं नारायणपरायण:॥ ७१॥
अनुवाद
भगवान नारायण का अनन्य भक्त, जो उन पर आश्रित है, अपने मन में निरंतर उन इच्छित भगवान का ध्यान करके परम पुरुषोत्तम को प्राप्त करता है ॥ 71॥
An exclusive devotee of Lord Narayana, who is dependent on Him, attains the Supreme Lord Purushottama by constantly meditating on Him, the desired Lord in his mind. ॥ 71॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥