Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.348.69: पुरुषसिंह! कुरुकुलधुरन्धर वीर! इन तीनों प्रकृतियों वाले जीवों में जो सात्त्विक स्वभाव वाला सात्त्विक पुरुष है, वही श्रेष्ठ है; क्योंकि वही मोक्ष का निश्चित अधिकारी है॥69॥   |   mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  12.348.69 
देहबन्धेषु पुरुष: श्रेष्ठ: कुरुकुलोद्वह।
सात्त्विक: पुरुषव्याघ्र भवेन्मोक्षाय निश्चित:॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
पुरुषसिंह! कुरुकुलधुरन्धर वीर! इन तीनों प्रकृतियों वाले जीवों में जो सात्त्विक स्वभाव वाला सात्त्विक पुरुष है, वही श्रेष्ठ है; क्योंकि वही मोक्ष का निश्चित अधिकारी है॥69॥
 
Purusha Singh! Kurukuldhurandhar Veer! Among the living beings having these three natures, the one who is a sattvik man with sattvik nature is the best; Because he is the sure owner of salvation. 69॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)