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mahabharat 12.348.68: वैशम्पायन जी बोले - भरतनन्दन ! शरीर के बंधन में बंधे हुए जीवों के लिए भगवान ने तीन प्रकार की प्रकृतियाँ बनाई हैं - सात्त्विक, राजसी और तामसी ॥68॥   |   mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.348.68 
वैशम्पायन उवाच
तिस्र: प्रकृतयो राजन् देहबन्धेषु निर्मिता:।
सात्त्विकी राजसी चैव तामसी चैव भारत॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन जी बोले - भरतनन्दन ! शरीर के बंधन में बंधे हुए जीवों के लिए भगवान ने तीन प्रकार की प्रकृतियाँ बनाई हैं - सात्त्विक, राजसी और तामसी ॥68॥
 
Vaishampayan ji said – Bharatanandan! For the living beings who are bound in the bondage of the body, God has created three types of natures – Sattvik, Rajasi and Tamasi. 68॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)