श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा  »  श्लोक 64-65h
 
 
श्लोक  12.348.64-65h 
एवं स भगवान् व्यासो गुरुर्मम विशाम्पते।
कथयामास धर्मज्ञो धर्मराज्ञे द्विजोत्तम:॥ ६४॥
ऋषीणां संनिधौ राजन् शृण्वतो: कृष्णभीष्मयो:।
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! इस प्रकार मेरे धर्मगुरु द्विज श्रेष्ठ भगवान व्यास ने श्रीकृष्ण और भीष्म की बात सुनते हुए ऋषियों के समक्ष धर्मराज को इस धर्म का उपदेश दिया। 64 1/2॥
 
Prajanath! In this way, my religious guru Dwija, the best Lord Vyas, while listening to Shri Krishna and Bhishma, preached this religion to Dharmaraja in the presence of sages. 64 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)