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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा
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श्लोक 56
श्लोक
12.348.56
धर्मज्ञानेन चैतेन सुप्रयुक्तेन कर्मणा।
अहिंसाधर्मयुक्तेन प्रीयते हरिरीश्वर:॥ ५६॥
अनुवाद
इस धर्म को जानकर और अहिंसापूर्वक इस सात्वतधर्म का आचरण करके जगदीश्वर श्री हरि प्रसन्न होते हैं ॥56॥
Jagdishwar Shri Hari becomes happy by knowing this religion and by putting into practice this satvatdharma with non-violence. 56॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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