श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  12.348.53 
यतीनां चापि यो धर्म: स ते पूर्वं नृपोत्तम।
कथितो हरिगीतासु समासविधिकल्पित:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
हे राजनश्रेष्ठ! मैंने पहले ही हरिगीता में तपस्वियों का धर्म संक्षेप में आपसे कह दिया है ॥ 53॥
 
O best of kings! I have already explained to you in a concise manner in the Hari Geeta the religion of the ascetics. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)