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mahabharat 12.348.52: इक्ष्वाकु के उपदेश से ही यह सात्वत धर्म सम्पूर्ण जगत में प्रचारित और प्रसारित हुआ। नरेश्वर! कल्प के अंत में भगवान नारायण ही इस धर्म को प्राप्त करेंगे।   |   mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.348.52 
इक्ष्वाकुणा च कथितो व्याप्य लोकानवस्थित:।
गमिष्यति क्षयान्ते च पुनर्नारायणं नृप॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
इक्ष्वाकु के उपदेश से ही यह सात्वत धर्म सम्पूर्ण जगत में प्रचारित और प्रसारित हुआ। नरेश्वर! कल्प के अंत में भगवान नारायण ही इस धर्म को प्राप्त करेंगे।
 
Due to the teachings of Ikshvaku, this Satvata religion got propagated and spread throughout the world. Nareshwar! In the end of Kalpa only Lord Narayana will attain this religion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)