इक्ष्वाकुणा च कथितो व्याप्य लोकानवस्थित:।
गमिष्यति क्षयान्ते च पुनर्नारायणं नृप॥ ५२॥
अनुवाद
इक्ष्वाकु के उपदेश से ही यह सात्वत धर्म सम्पूर्ण जगत में प्रचारित और प्रसारित हुआ। नरेश्वर! कल्प के अंत में भगवान नारायण ही इस धर्म को प्राप्त करेंगे।
Due to the teachings of Ikshvaku, this Satvata religion got propagated and spread throughout the world. Nareshwar! In the end of Kalpa only Lord Narayana will attain this religion.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥