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mahabharat 12.348.51: तब त्रेतायुग के प्रारम्भ में सूर्य ने सम्पूर्ण जगत के मनु और मनु के कल्याण के लिए अपने पुत्र इक्ष्वाकु को यह उपदेश दिया ॥51॥   |   mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.348.51 
त्रेतायुगादौ च ततो विवस्वान् मनवे ददौ।
मनुश्च लोकभूत्यर्थं सुतायेक्ष्वाकवे ददौ॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
तब त्रेतायुग के प्रारम्भ में सूर्य ने सम्पूर्ण जगत के मनु और मनु के कल्याण के लिए अपने पुत्र इक्ष्वाकु को यह उपदेश दिया ॥51॥
 
Then at the beginning of Tretayuga, Surya preached this to his son Ikshvaku for the welfare of Manu and Manu of the entire world. 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)