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mahabharat 12.348.5-6h: जो ब्राह्मण उपनिषदों सहित समस्त वेदों का अध्ययन करते हैं और त्याग के मार्ग का अनुसरण करते हैं, वे भगवान के अनन्य भक्त ही उत्तम गति को प्राप्त होते हैं ॥5 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  12.348.5-6h 
सहोपनिषदान् वेदान् ये विप्रा: सम्यगास्थिता:।
पठन्ति विधिमास्थाय ये चापि यतिधर्मिण:॥ ५॥
तेभ्यो विशिष्टां जानामि गतिमेकान्तिनां नृणाम्।
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण उपनिषदों सहित समस्त वेदों का अध्ययन करते हैं और त्याग के मार्ग का अनुसरण करते हैं, वे भगवान के अनन्य भक्त ही उत्तम गति को प्राप्त होते हैं ॥5 1/2॥
 
Those Brahmins who study all the Vedas including the Upanishads and follow the path of renunciation, the best destination is attained by those who are exclusive devotees of the Lord. ॥ 5 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)