श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  12.348.47 
ज्येष्ठाच्चाप्यनुसंक्रान्तो राजानमविकम्पनम्।
अन्तर्दधे ततो राजन्नेष धर्म: प्रभो हरे:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! राजा अविकम्पन ने ज्येष्ठ से इस धर्म की शिक्षा प्राप्त की थी। हे प्रभु! तत्पश्चात् यह भागवत धर्म पुनः लुप्त हो गया। 47।
 
O King! King Avikampana received the teachings of this Dharma from the eldest. O Lord! Thereafter this Bhagwat Dharma disappeared again. 47.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)