श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  12.348.46 
बर्हिषद्भॺश्च सम्प्राप्त: सामवेदान्तगं द्विजम्।
ज्येष्ठं नामाभिविख्यातं ज्येष्ठसामव्रतो हरि:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
ज्येष्ठ नामक एक प्रसिद्ध ब्राह्मण, जो सामवेद के प्रकाण्ड विद्वान थे, ने बर्हिषद नामक ऋषियों से इस धर्म का उपदेश प्राप्त किया था। उन्होंने ज्येष्ठासाम की उपासना करने का व्रत लिया था। इसीलिए वे ज्येष्ठ सामव्रती हरि कहलाए। 46॥
 
A famous Brahmin named Jyeshtha, who was an expert scholar of Samaveda, received the advice of this religion from the sages named Barhishad. He had taken a vow to worship Jyeshtasam. That is why he was called Jyeshtha Samavrati Hari. 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)