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mahabharat 12.348.45: हे राजन्! ब्रह्माजी ने इस धर्म को स्वीकार किया और अपने ढंग से इसका उचित रीति से प्रयोग किया। हे मनुष्यों के स्वामी! फिर उन्होंने बर्हिषद नामक ऋषियों को इसका अध्ययन कराया। 45.   |   mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.348.45 
गृहीतो ब्रह्मणा राजन् प्रयुक्तश्च यथाविधि।
अध्यापिताश्च मुनयो नाम्ना बर्हिषदो नृप॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
हे राजन्! ब्रह्माजी ने इस धर्म को स्वीकार किया और अपने ढंग से इसका उचित रीति से प्रयोग किया। हे मनुष्यों के स्वामी! फिर उन्होंने बर्हिषद नामक ऋषियों को इसका अध्ययन कराया। 45.
 
King! Brahmaji accepted this Dharma and he used it in his own way in a proper manner. O Lord of men! Then he made the sages named Barhishad study it. 45.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)