Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.348.42-43: वीरण ने इसका अध्ययन करके रैभ्यमुनि को उपदेश दिया। रैभ्य ने अपने पुत्र दिक्पाल कुक्षि को उपदेश दिया, जो महान् बुद्धिमान् और शुद्ध आचार वाला, उत्तम व्रतों का पालन करने वाला धार्मिक आत्मा था। तत्पश्चात् नारायण के मुख से निकला हुआ यह सात्वत धर्म पुनः लुप्त हो गया। 42-43॥ | mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वीरण ने इसका अध्ययन करके रैभ्यमुनि को उपदेश दिया। रैभ्य ने अपने पुत्र दिक्पाल कुक्षि को उपदेश दिया, जो महान् बुद्धिमान् और शुद्ध आचार वाला, उत्तम व्रतों का पालन करने वाला धार्मिक आत्मा था। तत्पश्चात् नारायण के मुख से निकला हुआ यह सात्वत धर्म पुनः लुप्त हो गया। 42-43॥
Veeran studied it and preached it to Raibhyamuni. Raibhya preached this to his son Dikpal Kukshi, a religious soul with great intelligence and pure morals, who observes good fasts. Thereafter this Satvat Dharma that came from the mouth of Narayana again disappeared. 42-43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥