श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा  »  श्लोक 40-41
 
 
श्लोक  12.348.40-41 
सनत्कुमारो भगवांस्तत: प्राधीतवान् नृप॥ ४०॥
सनत्कुमारादपि च वीरणो वै प्रजापति:।
कृतादौ कुरुशार्दूल धर्ममेतदधीतवान्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! तत्पश्चात् भगवान् सनत्कुमार ने उनसे उस सत्त्व-धर्म का उपदेश ग्रहण किया। कुरुश्रेष्ठ! कृतयुग के प्रारम्भ में वीरण प्रजापति ने सनत्कुमार से इस धर्म का उपदेश प्राप्त किया था ॥40-41॥
 
Nareshwar! After that Lord Sanatkumar accepted the teachings of that Sattva-Dharma from him. Kurushrestha! Veeran Prajapati received the teachings of this religion from Sanatkumar at the beginning of Kritayuga. 40-41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)