Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.348.39-40h: श्रेष्ठ! फिर प्राचीन काल में जब ब्रह्माजी ने नासिका द्वारा पाँचवाँ जन्म लिया, तब कमलनेत्र भगवान नारायण हरि ने स्वयं ब्रह्माजी के समक्ष इस धर्म का उपदेश किया था॥39 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नासिक्ये जन्मनि पुरा ब्रह्मण: पार्थिवोत्तम।
धर्ममेतं स्वयं देवो हरिर्नारायण: प्रभु:॥ ३९॥
तज्जगादारविन्दाक्षो ब्रह्मण: पश्यतस्तदा।
अनुवाद
श्रेष्ठ! फिर प्राचीन काल में जब ब्रह्माजी ने नासिका द्वारा पाँचवाँ जन्म लिया, तब कमलनेत्र भगवान नारायण हरि ने स्वयं ब्रह्माजी के समक्ष इस धर्म का उपदेश किया था॥39 1/2॥
The best! Then in ancient times, when Brahmaji took the fifth birth through Nasika, then lotus-eyed Lord Narayan Hari himself preached this religion in front of Brahmaji. 39 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥