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तत: स्वरोचिष: पुत्रं स्वयं शङ्खपदं नृप।
अध्यापयत् पुराव्यग्र: सर्वलोकपतिर्विभु:॥ ३७॥
अनुवाद
नरेश्वर! उन दिनों स्वारोचिष मनु समस्त लोकों के अधिपति एवं स्वामी थे। शांति प्राप्त करने से पूर्व उन्होंने स्वयं अपने पुत्र शंखपाद को इस धर्म का ज्ञान दिया था। 37॥
Nareshwar! In those days, Swarochish Manu was the ruler and lord of all the worlds. Before attaining peace, he himself imparted the knowledge of this religion to his son Shankhapada. 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥