श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.348.36 
धर्मप्रतिष्ठाहेतोश्च मनुं स्वारोचिषं तत:।
अध्यापयामास तदा लोकानां हितकाम्यया॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
फिर उन्होंने समस्त लोकों के कल्याण की इच्छा से इस धर्म की स्थापना के लिए उस समय स्वारोचिष मनु को इस धर्म का उपदेश दिया ॥36॥
 
Then, wishing for the welfare of all the worlds, for the establishment of this religion, he preached this religion to Swarochish Manu at that time. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)