श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा  »  श्लोक 32-33
 
 
श्लोक  12.348.32-33 
जगाम तमस: पारं यत्राव्यक्तं व्यवस्थितम्॥ ३२॥
ततोऽथ वरदो देवो ब्रह्मा लोकपितामह:।
असृजत् स ततो लोकान् कृत्स्नान् स्थावरजङ्गमान्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
ऐसा आदेश देकर वे अज्ञानरूपी अंधकार से परे स्थित अपने परम अव्यक्त धाम को चले गए। तत्पश्चात् वरदायिनी भगवान् लोकपितामह ब्रह्मा ने सम्पूर्ण चराचर लोकों की रचना की। 32-33॥
 
Giving this order, he went to his supreme unmanifested abode situated beyond the darkness of ignorance. Thereafter, Lokpitamah Brahma, the god of blessings, created all the grazing worlds. 32-33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)