Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.348.28-29: हे उत्तम व्रतों का पालन करने वाले पुत्र! मैं तुम्हारा कल्याण करूँगा और तुम्हारे तेज और बल को बढ़ाता रहूँगा। तुम मुझसे इस सात्वत नामक धर्म को ग्रहण करो और विधि-विधान से सत्ययुग की स्थापना करो।॥28-29॥ | mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रेयस्तव विधास्यामि बलं तेजश्च सुव्रत॥ २८॥
धर्मं च मत्तो गृह्णीष्व सात्वतं नाम नामत:।
तेन सृष्टं कृतयुगं स्थापयस्व यथाविधि॥ २९॥
अनुवाद
हे उत्तम व्रतों का पालन करने वाले पुत्र! मैं तुम्हारा कल्याण करूँगा और तुम्हारे तेज और बल को बढ़ाता रहूँगा। तुम मुझसे इस सात्वत नामक धर्म को ग्रहण करो और विधि-विधान से सत्ययुग की स्थापना करो।॥28-29॥
O son who observes the best vows! I will do good to you and will keep increasing your brilliance and strength. Accept this religion called Satvat from me and establish the Satya Yuga by following the rules and regulations.'॥ 28-29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥