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mahabharat 12.348.26: वास्तव में जगत् की रचना करने की इच्छा से भगवान नारायण हरि ने एक ऐसे पुरुष का विचार किया जो जगत् की रचना करने में पूर्णतः समर्थ हो ॥26॥   |   mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.348.26 
जगत‍्स्रष्टुमना देवो हरिर्नारायण: स्वयम्।
चिन्तयामास पुरुषं जगत‍्सर्गकरं प्रभुम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वास्तव में जगत् की रचना करने की इच्छा से भगवान नारायण हरि ने एक ऐसे पुरुष का विचार किया जो जगत् की रचना करने में पूर्णतः समर्थ हो ॥26॥
 
Actually, with the desire to create the world, Lord Narayan Hari thought of a man who would be completely capable of creating the world. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)