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mahabharat 12.348.25: हे नरसिंह! जब भगवान के कानों से चौथी बार महान ब्रह्मा उत्पन्न हुए, तब मैं तुम्हें बताऊँगा कि यह धर्म किस प्रकार उत्पन्न हुआ। सुनो।   |   mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.348.25 
यदा भूय: श्रवणजा सृष्टिरासीन्महात्मन:।
ब्रह्मण: पुरुषव्याघ्र तत्र कीर्तयत: शृणु॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे नरसिंह! जब भगवान के कानों से चौथी बार महान ब्रह्मा उत्पन्न हुए, तब मैं तुम्हें बताऊँगा कि यह धर्म किस प्रकार उत्पन्न हुआ। सुनो।
 
O lion of men! When the great Brahma was born for the fourth time from the ears of the Lord, then I will tell you how this Dharma came into being. Listen. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)