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mahabharat 12.348.21: सुपर्णा ने प्रतिदिन तीन बार यह उत्तम धर्म किया था; इसलिए इस व्रत या धर्म को यहाँ 'त्रिसौपर्ण' कहा गया है।   |   mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.348.21 
त्रि:परिक्रान्तवानेतत् सुपर्णो धर्ममुत्तमम्।
यस्मात् तस्माद् व्रतं ह्येतत् त्रिसौपर्णमिहोच्यते॥ २१॥
 
 
अनुवाद
सुपर्णा ने प्रतिदिन तीन बार यह उत्तम धर्म किया था; इसलिए इस व्रत या धर्म को यहाँ 'त्रिसौपर्ण' कहा गया है।
 
Suparna had performed this excellent Dharma thrice every day; therefore this fast or Dharma is called 'Trisauparna' here.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)