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mahabharat 12.348.20: सुपर्ण नामक ऋषि ने इन्द्रिय-संयम और मन-संयम के साथ घोर तपस्या करके भगवान् पुरुषोत्तम से इस धर्म को प्राप्त किया था ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.348.20 
सुपर्णो नाम तमृषि: प्राप्तवान् पुरुषोत्तमात्।
तपसा वै सुतप्तेन दमेन नियमेन च॥ २०॥
 
 
अनुवाद
सुपर्ण नामक ऋषि ने इन्द्रिय-संयम और मन-संयम के साथ घोर तपस्या करके भगवान् पुरुषोत्तम से इस धर्म को प्राप्त किया था ॥20॥
 
A sage named Suparna attained this Dharma from Lord Purushottam by doing great penance with sensual control and mental control. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)