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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा
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श्लोक 15
श्लोक
12.348.15
वैखानसा: फेनपेभ्यो धर्मं तं प्रतिपेदिरे।
वैखानसेभ्य: सोमस्तु तत: सोऽन्तर्दधे पुन:॥ १५॥
अनुवाद
वैखानों ने फेनपोनों से वह धर्म प्राप्त किया। सोम ने उनसे उसे ग्रहण किया। तत्पश्चात् वह धर्म पुनः लुप्त हो गया॥15॥
The Vaikhanas attained that Dharma from the Fenpons. Som accepted it from them. Thereafter that Dharma again vanished.॥15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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