Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.348.13-14: भूपाल! सृष्टि के आदि में जब ब्रह्माजी भगवान नारायण के मुख से मानसिक रूप से उत्पन्न हुए थे, उस समय स्वयं नारायण ने उन्हें इस धर्म का उपदेश दिया था। भरतनन्दन! नारायण ने उस धर्म से देवताओं और पितरों का पूजन अनुष्ठान किया था। तब फेनप ऋषियों ने उस धर्म को स्वीकार किया था॥13-14॥ | mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भूपाल! सृष्टि के आदि में जब ब्रह्माजी भगवान नारायण के मुख से मानसिक रूप से उत्पन्न हुए थे, उस समय स्वयं नारायण ने उन्हें इस धर्म का उपदेश दिया था। भरतनन्दन! नारायण ने उस धर्म से देवताओं और पितरों का पूजन अनुष्ठान किया था। तब फेनप ऋषियों ने उस धर्म को स्वीकार किया था॥13-14॥
Bhupal! In the beginning of creation, when Brahmaji was mentally born from the mouth of Lord Narayana, at that time Narayana himself had preached this religion to him. Bharatanandan! Narayana had performed the rituals of worshipping the gods and ancestors with that religion. Then the Fenap sages accepted that religion.॥ 13-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥