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mahabharat 12.348.10: राजन! यह धर्म सामवेद के समान है। यह प्राचीन सत्ययुग से ही प्रचलित है। जगत के देवता भगवान नारायण स्वयं इस धर्म का पालन करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.348.10 
सम्मित: सामवेदेन पुरैवादियुगे कृत:।
धार्यते स्वयमीशेन राजन् नारायणेन च॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राजन! यह धर्म सामवेद के समान है। यह प्राचीन सत्ययुग से ही प्रचलित है। जगत के देवता भगवान नारायण स्वयं इस धर्म का पालन करते हैं।
 
King! This religion is similar to the Samveda. It has been prevalent since the ancient Satya Yuga. The Lord Narayana, the God of the world himself, follows this religion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)