Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.348.1: जनमेजय बोले - ब्रह्मन् ! भगवान भक्तिपूर्वक पूजन करने वाले सभी भक्तों पर प्रसन्न होते हैं और उनकी विधिपूर्वक की गई पूजा को स्वीकार करते हैं। यह कैसा आनंद है ! 1॥ | mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जनमेजय उवाच
अहो ह्येकान्तिन: सर्वान् प्रीणाति भगवान् हरि:।
विधिप्रयुक्तां पूजां च गृह्णाति भगवान् स्वयम्॥ १॥
अनुवाद
जनमेजय बोले - ब्रह्मन् ! भगवान भक्तिपूर्वक पूजन करने वाले सभी भक्तों पर प्रसन्न होते हैं और उनकी विधिपूर्वक की गई पूजा को स्वीकार करते हैं। यह कैसा आनंद है ! 1॥
Janamejaya said – Brahman! God pleases all the devotees who worship with devotion and accepts their duly performed worship. What a joy this is! 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥