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mahabharat 12.347.91-92: भगवान केशव ब्रह्मा आदि देवताओं, समस्त लोकों, महर्षियों, सांख्य के विशेषज्ञों, योगियों और आत्मसिद्ध तपस्वियों के मन की बातें भी जानते हैं; परन्तु उनके मन में क्या है? यह उनमें से कोई नहीं जानता।   |   mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 91-92
 
 
श्लोक  12.347.91-92 
ब्रह्मादीनां स लोकानामृषीणां च महात्मनाम्॥ ९१॥
सांख्यानां योगिनां चापि यतीनामात्मवेदिनाम्।
मनीषितं विजानाति केशवो न तु तस्य ते॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
भगवान केशव ब्रह्मा आदि देवताओं, समस्त लोकों, महर्षियों, सांख्य के विशेषज्ञों, योगियों और आत्मसिद्ध तपस्वियों के मन की बातें भी जानते हैं; परन्तु उनके मन में क्या है? यह उनमें से कोई नहीं जानता।
 
Lord Keshav also knows the thoughts of the gods like Brahma, all the worlds, great sages, experts in Sankhya, Yogis and self-realized ascetics; but what is in his mind? None of them knows this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)