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mahabharat 12.347.87: कीर्ति, श्री और लक्ष्मी जैसी देवियाँ नारायण को अपना परम आश्रय मानती हैं। सांख्य का परम अर्थ भी नारायण है और योग भी नारायण का ही एक रूप है। 87.   |   mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  12.347.87 
नारायणपरा कीर्ति: श्रीश्च लक्ष्मीश्च देवता:।
नारायणपरं सांख्यं योगो नारायणात्मक:॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
कीर्ति, श्री और लक्ष्मी जैसी देवियाँ नारायण को अपना परम आश्रय मानती हैं। सांख्य का परम अर्थ भी नारायण है और योग भी नारायण का ही एक रूप है। 87.
 
Goddesses like Kirti, Shri and Lakshmi consider Narayana as their ultimate refuge. The ultimate meaning of Sankhya is also Narayana and Yoga is also a form of Narayana. 87.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)