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mahabharat 12.347.86: गुप्त गुणों और लक्षणोंवाला मन, भूत, काल और नक्षत्र- ये सब नारायण के अधीन हैं ॥86॥   |   mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  12.347.86 
मनश्चापि ततो भूतमव्यक्तगुणलक्षणम्।
नारायणपर: कालो ज्योतिषामयनं च यत्॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
गुप्त गुणों और लक्षणोंवाला मन, भूत, काल और नक्षत्र- ये सब नारायण के अधीन हैं ॥86॥
 
The mind with latent qualities and characteristics, the ghost, time and the constellations – all these are dependent on Narayana. 86॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)