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mahabharat 12.347.85: वायु का स्पर्श गुण भी नारायण के समान है और आकाश का शब्द गुण भी नारायण के समान है ॥85॥   |   mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  12.347.85 
नारायणात्मकश्चापि स्पर्शो वायुगुण: स्मृत:।
नारायणात्मकश्चैव शब्द आकाशसम्भव:॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
वायु का स्पर्श गुण भी नारायण के समान है और आकाश का शब्द गुण भी नारायण के समान है ॥85॥
 
The quality of air, touch, is also Narayan-like and the quality of sky, word, is also Narayan-like. 85॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)