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mahabharat 12.347.79: भगवान् जिस भी शरीर को धारण करके कोई कार्य करना चाहते हैं, उसे स्वयं ही कार्य करते समय प्रकट कर देते हैं ॥ 79॥   |   mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  12.347.79 
यां यामिच्छेत् तनुं देव: कर्तुं कार्यविधौ क्वचित्।
तां तां कुर्याद् विकुर्वाण: स्वयमात्मानमात्मना॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
भगवान् जिस भी शरीर को धारण करके कोई कार्य करना चाहते हैं, उसे स्वयं ही कार्य करते समय प्रकट कर देते हैं ॥ 79॥
 
Whichever body the Supreme Being wishes to assume to accomplish a task, He Himself reveals it when performing the task. ॥ 79॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)