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mahabharat 12.347.68-69h: इस प्रकार बातचीत करके उन दोनों ने भगवान को जगाया। यह जानकर कि वे युद्ध के लिए उत्सुक हैं, भगवान पुरुषोत्तम जाग उठे। फिर उन दोनों राक्षस राजाओं को ध्यानपूर्वक देखकर उन्होंने मन ही मन उनसे युद्ध करने का निश्चय किया।   |   mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 68-69h
 
 
श्लोक  12.347.68-69h 
इत्युच्चारितवाक्यौ तौ बोधयामासतुर्हरिम्।
युद्धार्थिनौ हि विज्ञाय विबुद्ध: पुरुषोत्तम:॥ ६८॥
निरीक्ष्य चासुरेन्द्रौ तौ ततो युद्धे मनो दधे।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार बातचीत करके उन दोनों ने भगवान को जगाया। यह जानकर कि वे युद्ध के लिए उत्सुक हैं, भगवान पुरुषोत्तम जाग उठे। फिर उन दोनों राक्षस राजाओं को ध्यानपूर्वक देखकर उन्होंने मन ही मन उनसे युद्ध करने का निश्चय किया।
 
After talking in this manner, both of them woke up the Lord. Knowing that they were eager for battle, Lord Purushottama woke up. Then after carefully observing those two demon kings, he decided in his mind to fight with them. 68 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)