Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.347.64-65: जल पर शेषनाग के शरीर की एक शय्या बनी हुई थी, जिसकी लंबाई भगवान की मूर्ति के अनुरूप थी। वह शय्या ज्वालाओं की मालाओं से आच्छादित प्रतीत हो रही थी। शुद्ध सत्वगुण से युक्त और मनोहर कांति वाले भगवान नारायण उस पर शयन कर रहे थे। उन्हें देखकर दोनों दैत्यराज जोर-जोर से हंसने लगे। 64-65 | mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जल पर शेषनाग के शरीर की एक शय्या बनी हुई थी, जिसकी लंबाई भगवान की मूर्ति के अनुरूप थी। वह शय्या ज्वालाओं की मालाओं से आच्छादित प्रतीत हो रही थी। शुद्ध सत्वगुण से युक्त और मनोहर कांति वाले भगवान नारायण उस पर शयन कर रहे थे। उन्हें देखकर दोनों दैत्यराज जोर-जोर से हंसने लगे। 64-65
A bed of Sheshnag's body was made on the water, the length of which was in accordance with the Lord's idol. That bed appeared to be covered with garlands of flames. Lord Narayana, endowed with pure Sattva Guna and having a charming radiance, was sleeping on it. Seeing him, both the demon kings started laughing loudly. 64-65.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥