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mahabharat 12.347.6: मुने! उस पुण्यात्मा तथा अनन्त बलवान एवं अद्वितीय रूप वाले श्रेष्ठ हयग्रीव का दर्शन पाकर ब्रह्माजी ने क्या किया?   |   mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.347.6 
दृष्ट्वा हि विबुधश्रेष्ठमपूर्वममितौजसम्।
तदश्वशिरसं पुण्यं ब्रह्मा किमकरोन्मुने॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मुने! उस पुण्यात्मा तथा अनन्त बलवान एवं अद्वितीय रूप वाले श्रेष्ठ हयग्रीव का दर्शन पाकर ब्रह्माजी ने क्या किया?
 
Mune! What did Lord Brahma do after having the darshan of that virtuous soul and the best Hayagriva, who is infinitely powerful and of unique form? 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)