Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.347.53-54h: नरेश्वर! तमोमयी कालरात्रि ही उनकी ग्रीवा थीं। इस प्रकार अनेक मूर्तियों से आच्छादित हयग्रीव का रूप धारण करके जगदीश्वर श्रीहरि वहाँ से अन्तर्धान हो गए और रसातल में पहुँच गए। 53 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ग्रीवा चास्याभवद् राजन् कालरात्रिर्गुणोत्तरा।
एतद्धयशिर: कृत्वा नानामूर्तिभिरावृतम्॥ ५३॥
अन्तर्दधौ स विश्वेशो विवेश च रसां प्रभु:।
अनुवाद
नरेश्वर! तमोमयी कालरात्रि ही उनकी ग्रीवा थीं। इस प्रकार अनेक मूर्तियों से आच्छादित हयग्रीव का रूप धारण करके जगदीश्वर श्रीहरि वहाँ से अन्तर्धान हो गए और रसातल में पहुँच गए। 53 1/2॥
Nareshwar! Tamomayi Kalratri was his cervix. In this way, taking the form of Hayagriva covered with many idols, Jagdishwar Shri Hari disappeared from there and reached the abyss. 53 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥