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mahabharat 12.347.44: हे कमलनयन! मैं आपका पुत्र हूँ, जो शुद्ध सत्त्वमय शरीर से उत्पन्न हुआ है। आप ही परमेश्वर, आत्मा, स्वयंभू और परमेश्वर हैं॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.347.44 
प्रथित: पुण्डरीकाक्ष प्रधानगुणकल्पित:।
त्वमीश्वर: स्वभावश्च स्वयम्भू: पुरुषोत्तम॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
हे कमलनयन! मैं आपका पुत्र हूँ, जो शुद्ध सत्त्वमय शरीर से उत्पन्न हुआ है। आप ही परमेश्वर, आत्मा, स्वयंभू और परमेश्वर हैं॥ 44॥
 
Kamalnayan! I am your son, born from a pure Sattvamaya body. You are the Supreme Lord, the Self, the Self-existent and the Supreme Being.॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)