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mahabharat 12.347.41: तत्पश्चात् आपकी कृपा से मेरा जो तीसरा महत्वपूर्ण जन्म हुआ, वह वाचिक था, अर्थात् आपके वचन मात्र से संभव हुआ। हे प्रभु! उसके बाद मेरा चौथा जन्म आपके कानों के माध्यम से हुआ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  12.347.41 
त्वत्प्रसादात् तु मे जन्म तृतीयं वाचिकं महत्।
त्वत्त: श्रवणजं चापि चतुर्थं जन्म मे विभो॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् आपकी कृपा से मेरा जो तीसरा महत्वपूर्ण जन्म हुआ, वह वाचिक था, अर्थात् आपके वचन मात्र से संभव हुआ। हे प्रभु! उसके बाद मेरा चौथा जन्म आपके कानों के माध्यम से हुआ॥ 41॥
 
Thereafter, my third important birth which took place by your grace was verbal, i.e. it was made possible by your mere words. O Lord! After that, my fourth birth took place through your ears.॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)