Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.347.40: आपसे मेरा प्रथम जन्म 'मानस जन्म' कहलाता है, जो ब्राह्मणों द्वारा आदरणीय है। अर्थात् मैं पहले आपके मन से उत्पन्न हुआ था। तत्पश्चात् पूर्वकाल में आपके नेत्रों से उत्पन्न हुआ। वह मेरा दूसरा जन्म था॥40॥ | mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वत्तो मे मानसं जन्म प्रथमं द्विजपूजितम्।
चाक्षुषं वै द्वितीयं मे जन्म चासीत् पुरातनम्॥ ४०॥
अनुवाद
आपसे मेरा प्रथम जन्म 'मानस जन्म' कहलाता है, जो ब्राह्मणों द्वारा आदरणीय है। अर्थात् मैं पहले आपके मन से उत्पन्न हुआ था। तत्पश्चात् पूर्वकाल में आपके नेत्रों से उत्पन्न हुआ। वह मेरा दूसरा जन्म था॥40॥
My first birth from you is called 'Manas Janma', respected by the Brahmins. That is, I was first born from your mind. Thereafter, in the earlier times, I was born from your eyes. That was my second birth.॥ 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥