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mahabharat 12.347.24: जिस कमल के पत्ते पर वे बैठे थे, वह सूर्य के समान चमक रहा था। भगवान नारायण की प्रेरणा से उस पर पहले से ही जल की बूँदें पड़ रही थीं, जो रजोगुण और तमोगुण की प्रतीक थीं॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.347.24 
पूर्वमेव च पद्मस्य पत्रे सूर्यांशुसप्रभे।
नारायणकृतौ बिन्दू अपामास्तां गुणोत्तरौ॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जिस कमल के पत्ते पर वे बैठे थे, वह सूर्य के समान चमक रहा था। भगवान नारायण की प्रेरणा से उस पर पहले से ही जल की बूँदें पड़ रही थीं, जो रजोगुण और तमोगुण की प्रतीक थीं॥ 24॥
 
The leaf of the lotus on which he was sitting was shining like the sun. Drops of water had already fallen on it due to the inspiration of Lord Narayana, which were the symbol of Rajoguna and Tamoguna.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)