Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.347.10-11h: जनमेजय बोले, "हे महात्माओं में श्रेष्ठ! ब्रह्माजी ने भगवान का जो हयग्रीव अवतार देखा था, वह किस कारण से उत्पन्न हुआ? कृपया मुझे यह बताइये।"   |   mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  12.347.10-11h 
जनमेजय उवाच
यत्तद् दर्शितवान् ब्रह्मा देवं हयशिरोधरम्॥ १०॥
किमर्थं तत् समभवत् तन्ममाचक्ष्व सत्तम।
 
 
अनुवाद
जनमेजय बोले, "हे महात्माओं में श्रेष्ठ! ब्रह्माजी ने भगवान का जो हयग्रीव अवतार देखा था, वह किस कारण से उत्पन्न हुआ? कृपया मुझे यह बताइये।"
 
Janamejaya said, "O great sage amongst the noble souls! Why did the Hayagriva avatar of the Lord, which Brahmaji had seen, come into being? Please tell me this."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)