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mahabharat 12.347.1: शौनकजी बोले - सूतनंदन! हमने षट्गुण ऐश्वर्य से युक्त उन परमात्मा श्री हरिक का माहात्म्य सुना और यह भी जाना कि उन्होंने धर्म के घर में नर-नारायण रूप में जन्म लिया है॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.347.1 
शौनक उवाच
श्रुतं भगवतस्तस्य माहात्म्यं परमात्मन:।
जन्म धर्मगृहे चैव नरनारायणात्मकम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
शौनकजी बोले - सूतनंदन! हमने षट्गुण ऐश्वर्य से युक्त उन परमात्मा श्री हरिक का माहात्म्य सुना और यह भी जाना कि उन्होंने धर्म के घर में नर-नारायण रूप में जन्म लिया है॥1॥
 
Shaunaka said – Sutanandan! We heard the greatness of that Supreme Soul Shri Harika, who is endowed with the sixfold opulence, and also came to know that He had taken birth in the form of Nar-Narayan in the house of Dharma. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)